इस मस्तीखोर राहुल को क्या बना दिया हूँ मै,
अनजाने में,
खुश होने के लिए भी एक बार इज़ाज़त लेता हूँ।
ये नही हूँ मै, इतना तो मालूम है
कब ढूंढ पाता हूँ खुद को, किस्मत की बात है।

कौन छिप के देख रहा,
मै वो क्यों रह सकता जो मै हूँ?
क्यों हर बार एक किरदार बना रहता हूँ?

Advertisements