Dil ki kavita, jeet ki kavita

कुछ पल सुनहरे होते हैं,
पर अक्सर वो थोड़े होते हैं
गिने चुने ख्वाब ही जब पुरे होते है
तब भी दिल में चाहत थोड़े थोड़े होते है।

गन गुना रहा हूँ मैं, गीत मेरा
कोरे कागज शुरू होता है, संगीत मेरा
कौन सुनेगा, किसे उतारू शब्दों में?
ख्याल दिल के थोरे होते है, मेरे होते है।

बारिश में भींगे हुए, तनहा अकेले
बाहें समेटे हम होते है,
दिल भर आता है यादों के किस्सों से
अकेले थोरे हम होते है, थोरे कम होते है।

खर्च हो रहा हूँ मैं
वक़्त कि तिज़ोरी नही है मेरे पास।
दर्द होता है मुझे भी हर बार हार कर
पर दर्द से ही एहसास होता है की जिंदा हु मैं !

फिर उठूंगा, फिर चलूँगा
चाहे डगमगा जाऊ, फिर भी न रुकुंगा,
चलता हूँ मैं, तभी ज़िंदा हूँ मैं
चुप हूँ तब भी एक किस्सा हूँ मैं।